Monday, March 9, 2026
SP Dharmendra Yadav: 'गंगा पर खतरा...' धर्मेंद्र यादव ने केंद्रीय मंत्री से संसद में पूछा सवाल, जानें क्या मिला जवाब
<p style="text-align: justify;">सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने संस्कृति मंत्री से वाराणसी में मणिकर्णिका घाट पर चल रहे विकास कार्यों को लेकर सवाल पूछा. <a title="धर्मेंद्र" href="https://www.abplive.com/topic/dharmendra" data-type="interlinkingkeywords">धर्मेंद्र</a> यादव ने पूछा कि क्या 'परिवर्तन' के नाम पर चल रहे निर्माण कार्यों के कारण मणिकर्णिका घाट का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व कम हो रहा है और क्या सरकार ने इसके पुरातात्विक स्वरूप में हुए बदलाव के बारे में कोई स्वतंत्र जांच कराई है.</p>
<p style="text-align: justify;">इसके अलावा क्या भारी कंक्रीट निर्माण ने गंगा नदी के प्राकृतिक प्रवाह और घाट की आधारभूत स्थिरता के लिए गंभीर खतरा पैदा कर दिया है. इस संबंध में सरकार की जवाबदेही क्या है, क्योंकि स्थानीय प्रशासन घाट पर आने वाले शोक संतप्त परिवारों से अवैध वसूली और वहां की अव्यवस्था को रोकने में पूरी तरह विफल रहा है. इसके अलावा उन्होंने ये भी पूछा कि क्या 'विकास' का यह मॉडल स्थानीय समुदायों और सदियों से वहां रहने वाले डोम समुदाय के हितों की अनदेखी कर रहा है और क्या सरकार इस परियोजना की समीक्षा के लिए विशेषज्ञों की उच्च-स्तरीय समिति गठित करने का प्रस्ताव करती है?</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>मणिकर्णिका घाट को लेकर क्या बोले संस्कृति मंत्री</strong><br />संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने जवाब देते हुए बताया कि मणिकर्णिका घाट भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन संरक्षित स्मारक नहीं है. हालांकि, वाराणसी के जिला मजिस्ट्रेट से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मणिकर्णिका घाट पर चल रहा काम एक पुनर्स्थापना और संरक्षण परियोजना है, जिसका मकसद घाट की मजबूती को बहाल करना और अंतिम संस्कार के लिए आने वाले परिवारों के लिए मूलभूत सुविधाओं में सुधार करना है, साथ ही गंगा नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखना है.</p>
<p style="text-align: justify;">इसके साथ-साथ केंद्रीय मंत्री ने जानकारी दी कि पुनर्स्थापना और संरक्षण कार्य घाट की आधारभूत स्थिरता को मजबूत करेंगे, साथ ही नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखेंगे. स्थानीय प्रशासन घाट पर सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने के लिए कदम उठाता है. उन्होंने बताया कि इस संरक्षण परियोजना को स्थानीय समुदायों के साथ समन्वय बनाकर स्थानीय प्रशासन द्वारा तैयार किया गया है. </p>
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