Friday, November 28, 2025

India Earthquake: भूकंप के चपेट में आ सकता है भारत! नए नक्शे से चौंकाने वाला खुलासा, जानें क्या है पूरा मामला

<p style="text-align: justify;">भारत सरकार ने साल 2025 के लिए जारी किए गए नए भूकंप डिज़ाइन कोड में देश की भूकंपीय स्थिति का बड़ा पुनर्मूल्यांकन किया है. इस बार सबसे जरूरी बदलाव यह है कि पूरा हिमालय क्षेत्र सीधे ज़ोन VI में डाल दिया गया है, जिसे सबसे अधिक जोखिम वाला क्षेत्र माना जाता है. यह पहला अवसर है जब पूरे हिमालय को एक ही उच्च भूकंप श्रेणी में शामिल किया गया है. इससे साफ संकेत मिलता है कि भविष्य की संरचनाओं और शहरों की प्लानिंग में अब कहीं अधिक सावधानी बरतनी होगी.</p> <p style="text-align: justify;">TOI की रिपोर्ट के मुताबिक India Earthquake Zoning Map 2025 में भारत का लगभग 61 प्रतिशत भूभाग अब मध्यम से अत्यधिक भूकंप जोखिम के दायरे में आ गया है. यह बदलाव पिछले कई दशकों की तुलना में सबसे बड़ा तकनीकी सुधार माना जा रहा है, क्योंकि इसमें इतिहास पर आधारित आकलन के बजाय वर्तमान भूवैज्ञानिक स्थिति और वैज्ञानिक अध्ययन को अधिक महत्व दिया गया है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>हिमालय को सबसे खतरनाक ज़ोन में क्यों रखा गया</strong></p> <p style="text-align: justify;">हिमालयी क्षेत्र पर किए गए नए भूगर्भीय अध्ययन यह दर्शाते हैं कि यहां की सतह भले शांत दिखाई दे, लेकिन इसके भीतर अत्यधिक दबाव लगातार सक्रिय रहता है. पहले इस पूरे क्षेत्र को दो अलग-अलग ज़ोन में बांट दिया गया था, जबकि वैज्ञानिकों का मानना था कि यह विभाजन भूकंपीय वास्तविकता को सही तरीके से नहीं दिखाता. नई रिपोर्ट यह साफ कर देती है कि हिमालय के भीतर मौजूद फॉल्ट लाइन अभी भी शक्तिशाली भूकंप पैदा करने की क्षमता रखती हैं, इसी वजह से इसे सबसे खतरनाक श्रेणी में शामिल किया गया है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>सीमा पर बसे शहरों की नई श्रेणी</strong></p> <p style="text-align: justify;">इस बार मानचित्र में एक नया प्रावधान जोड़ा गया है, जिसके अनुसार अगर कोई शहर दो भूकंपीय ज़ोनों की सीमा के पास आता है, तो उसे खुद उच्च श्रेणी वाले ज़ोन में माना जाएगा. इससे कई ऐसे शहर, जो पहले कम जोखिम में समझे जाते थे, अब अधिक संवेदनशील क्षेत्रों की सूची में आ गए हैं. यह बदलाव प्रशासनिक सीमाओं के पुराने नियमों को पूरी तरह बदल देता है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>कैसे तैयार हुआ नया मानचित्र</strong></p> <p style="text-align: justify;">भारतीय मानक ब्यूरो ने इस ज़ोनिंग को PSHA यानी प्रोबैबिलिस्टिक सीस्मिक हैज़र्ड असेसमेंट मॉडल के आधार पर तैयार किया है. इस मॉडल में धरती की परतों की मोटाई, प्लेटों के टकराव का दबाव, फॉल्ट लाइन की सक्रियता, तरंगों की गति और संभावित अधिकतम भूकंप सहित कई वैज्ञानिक जानकारियों का उपयोग किया गया है. यही वजह है कि यह नया संस्करण पहले की तुलना में काफी अधिक विश्वसनीय और आधुनिक माना जा रहा है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>नए निर्माणों के लिए सख्त नियम</strong></p> <p style="text-align: justify;">2025 के कोड के लागू होने के बाद अब सभी नई इमारतों को भूकंप-रोधी मानकों के अनुसार बनाना अनिवार्य होगा. अस्पताल, विद्यालय, पुल, पाइपलाइन और अन्य महत्वपूर्ण संरचनाएँ इस तरह तैयार की जाएँगी कि बड़े भूकंप के बाद भी उनका संचालन बाधित न हो. भारी उपकरणों को सुरक्षित रूप से फिट करने और भवनों की मजबूती बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>एक्सपोज़र विंडो का नया प्रावधान</strong></p> <p style="text-align: justify;">भूकंप जोखिम को केवल जमीन की गतिविधि से नहीं, बल्कि वहां रहने वाली जनसंख्या, आर्थिक स्थिति, भवन घनत्व और स्थानीय संसाधनों की संवेदनशीलता से भी आंका जाएगा. इससे हर शहर के लिए अधिक वास्तविक और सटीक खतरा मानचित्र तैयार हो सकेगा, जो भविष्य की योजनाओं में बेहद उपयोगी साबित होगा.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>दक्षिण भारत में बदलाव कम क्यों</strong></p> <p style="text-align: justify;">नई ज़ोनिंग में सबसे कम परिवर्तन दक्षिण भारत में किए गए हैं. इसका मुख्य कारण यह है कि प्रायद्वीपीय क्षेत्र भूगर्भीय रूप से अधिक स्थिर माना जाता है और यहां बड़े भूकंप की संभावना कम होती है. इसलिए इसकी जोखिम श्रेणी लगभग पहले जैसी ही बनी हुई है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: </strong><a href="https://www.abplive.com/news/india/piyush-goyal-on-india-trade-deal-donald-trump-tariff-canada-uk-israel-free-trade-deal-3050451" target="_blank" rel="noopener"><strong>ट्रंप के टैरिफ से निपटने के लिए भारत का प्लान, इन देशों के साथ चल रही ट्रेड टॉक, क्या करेगा अमेरिका?</strong></a></p>

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