Sunday, March 23, 2025
Tamil Nadu Politics: 'उन्हें राज्य के बारे में कुछ नहीं पता', अन्नामलाई पर डीके शिवकुमार का पलटवार
<p style="text-align: justify;" data-pm-slice="1 1 []"><strong>Shivakumar Vs Annamalai: </strong>कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने रविवार (23 मार्च) को चेन्नई इंटरनेशनल एयर पोर्ट पर भाजपा नेता अन्नामलाई के बयान पर कड़ा पलटवार किया. अन्नामलाई ने दावा किया था कि शनिवार (22 मार्च) को चेन्नई में आयोजित दक्षिण भारतीय राज्यों की बैठक बिना योजना के आयोजित की गई थी. शिवकुमार ने इस बयान को महत्वहीन बताते हुए कहा कि ये केवल पार्टी के स्वार्थ का मुद्दा है और इससे ज्यादा कुछ नहीं.</p>
<p style="text-align: justify;">शिवकुमार ने कहा कि असल सवाल ये है कि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री देश को क्या संदेश दे रहे हैं न कि अन्नामलाई का बयान. उन्होंने अन्नामलाई पर हमला करते हुए कहा कि उन्हें राज्य की स्थिति के बारे में कुछ भी नहीं पता और वह केवल अपनी पार्टी के हितों को साधने में लगे हैं. शिवकुमार ने तंज कसते हुए ये भी कहा कि अन्नामलाई का ध्यान राज्य की समस्याओं पर नहीं बल्कि अपनी पार्टी की प्राथमिकताओं पर है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>तेलंगाना के CM रेवंत रेड्डी के बयान पर शिवकुमार की प्रतिक्रिया</strong></p>
<p style="text-align: justify;">शिवकुमार ने कहा कि राज्य विधानसभा क्षेत्रों की एकजुटता के मामले में तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का पहले ही बयान आ चुका है, लेकिन इस समय प्राथमिकता दक्षिण भारत की एकजुट आवाज को मजबूत करने की है. उन्होंने कहा 'हम अपनी स्थानीय आवाज को ताकत देंगे फिर संसद में परिसीमन जैसे मुद्दों पर बात करेंगे.' शिवकुमार ने डीएमके की इस पहल को सराहते हुए इसे एक मजबूत शुरुआत बताया.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>दक्षिण भारत की एकजुटता पर शिवकुमार का जोर</strong></p>
<p style="text-align: justify;">शिवकुमार ने बताया कि इस बैठक में दक्षिण भारत के राज्यों ने लोकसभा सीटों के परिसीमन के खिलाफ एकजुटता दिखाई. उन्होंने इसे देश के हित में बताया और कहा कि दक्षिण भारत ने जनसंख्या नियंत्रण में अपना योगदान दिया है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. शिवकुमार ने डीएमके की ओर से आयोजित इस बैठक को पॉजिटिव कदम मानते हुए इसकी सराहना की.</p>
<p style="text-align: justify;">तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की ओर से आयोजित इस बैठक में 40 से 50 राजनीतिक दलों को आमंत्रित किया गया था. इसमें दक्षिण भारत के सभी राज्यों के प्रतिनिधि शामिल थे साथ ही ओडिशा और पंजाब जैसे राज्यों के नेताओं ने भी इस बैठक में भाग लिया. इस तरह की बैठकें दक्षिण भारत के राज्यों की एकजुटता को बढ़ावा देने और उनके हितों की रक्षा करने के लिए अहम कदम साबित हो रही हैं.</p>
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